अब AI कैमरे संभालेंगे सड़क की कमान; ₹300 करोड़ की योजना से बदल जाएगी ट्रैफिक की सूरत
AI Cameras to Take Charge of the Roads
पटना। Intelligent Traffic Management System बिहार में यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) लागू करने की तैयारी है। इस तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) वाले कैमरों के साथ फेसियल रिकग्निशन और सर्विलांस की भी व्यवस्था होगी जो चेहरों की भी पहचान कर सकेंगे।
फेसियल रिकग्निशन से अपराधियों पर भी नजर
इससे बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों का तो चालान कटेगा ही, अपराधियों की निगरानी में भी सहूलियत होगी।
विभागीय जानकारी के अनुसार, इस सिस्टम को राज्य से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), राज्यीय राजमार्ग (एसएच) के साथ प्रमुख शहरों और टोल प्लाजा पर लागू किया जाएगा, जिसके लिए आधुनिक तकनीक वाले कैमरे और सॉफ्टवेयर से लैस उपकरण लगाए जाएंगे।
एआई कैमरे खुद काटेंगे चालान, नियम तोड़ना होगा महंगा
पूरे राज्य में 500-700 जगहों को चिह्नित कर इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके लिए राज्य स्तर पर ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर और जिला स्तर पर व्यूइंग सेंटर (वीसी) भी बनाए जाएंगे, जहां से पूरे सिस्टम की निगरानी की जाएगी।
इस पूरी परियोजना की लागत 300 करोड़ रुपये अनुमानित है।
परिवहन विभाग ने इस परियोजना को लागू करने के लिए एजेंसी की खोज शुरू कर दी है। इसके लिए शुक्रवार को सूचना जारी कर एजेंसियों से 24 अप्रैल तक आवेदन मांगे गए हैं। एजेंसी को परियोजना की स्थापना के साथ अगले दस सालों तक मेंटेनेंस की भी जवाबदेही देने की योजना है।
इन तकनीकों से लैस होगा सिस्टम
- एआई वाले कैमरे : इस व्यवस्था में एआइ आधारित कैमरे स्वतः ही ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट जैसे उल्लंघनों को पकड़कर चालान जारी करेंगे। इससे लोगों में नियमों का पालन करने की प्रवृत्ति भी बढ़ेगी।
- फेसियल रिकग्निशन और सर्विलांस : इस सिस्टम से एआइ वाले कैमरे चेहरों को पहचान सकेंगे। इससे बार-बार ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करने वालों को चिह्नित करने के साथ अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
- इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम : इसके जरिए सड़क दुर्घटना या किसी आपात स्थिति की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी। इससे राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू हो सकेंगे, जिससे जान-माल का नुकसान कम किया जा सकेगा।
- जीएसटी ई-वे बिल वेरिफिकेशन : इससे मालवाहक और खनिज पदार्थ ढोने वाले वाहनों की निगरानी की जाएगी जिससे अवैध परिवहन पर रोक लगेगी। जीएसटी ई-वे बिल वेरिफिकेशन को भी सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
- एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम : इससे ट्रैफिक के दबाव के अनुसार सिग्नल की टाइमिंग बदलेगी। इससे व्यस्त चौराहों पर वाहन चालकों को सिग्नल पर बेवजह लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। जाम की समस्या भी कम हागी।